श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 6: अश्वत्थामाका शिविर-द्वारपर एक अद्भुत पुरुषको देखकर उसपर अस्त्रोंका प्रहार करना और अस्त्रोंके अभावमें चिन्तित हो भगवान् शिवकी शरणमें जाना  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  10.6.20-21h 
शास्त्रदृष्टानविद्वान‍् य: समतीत्य जिघांसति॥ २०॥
स पथ: प्रच्युतो धर्मात् कुपथे प्रतिहन्यते।
 
 
अनुवाद
जो मूर्ख बुद्धिमान पुरुषों की आज्ञा का उल्लंघन करता है और दूसरों को हानि पहुँचाना चाहता है, वह धर्म के मार्ग से भटककर कुमार्ग में पड़ जाता है और स्वयं मारा जाता है।॥20 1/2॥
 
The fool who disobeys the commands of the wise men and wants to harm others, strays from the path of righteousness and falls into the evil path and gets killed himself.॥ 20 1/2॥
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