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mahabharat 10.6.2: संजय ने कहा- राजन! कृतवर्मा और कृपाचार्य को आमंत्रित करके महारथी अश्वत्थामा क्रोधित मन से शिविर के द्वार पर आये।   |   mahabharat अध्याय 10.6: अश्वत्थामाका शिविर-द्वारपर एक अद्भुत पुरुषको देखकर उसपर अस्त्रोंका प्रहार करना और अस्त्रोंके अभावमें चिन्तित हो भगवान् शिवकी शरणमें जाना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 6: अश्वत्थामाका शिविर-द्वारपर एक अद्भुत पुरुषको देखकर उसपर अस्त्रोंका प्रहार करना और अस्त्रोंके अभावमें चिन्तित हो भगवान् शिवकी शरणमें जाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  10.6.2 
संजय उवाच
कृतवर्माणमामन्त्र्य कृपं च स महारथ:।
द्रौणिर्मन्युपरीतात्मा शिबिरद्वारमागमत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा- राजन! कृतवर्मा और कृपाचार्य को आमंत्रित करके महारथी अश्वत्थामा क्रोधित मन से शिविर के द्वार पर आये।
 
Sanjay said- Rajan! After inviting Kritavarma and Kripacharya, the great warrior Ashwatthama came to the camp gate with an angry heart. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)