Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.6.19-20h: जो मनुष्य अप्रिय किन्तु हितकर वचन बोलने वाले अपने मित्रों की सलाह नहीं सुनता, वह विपत्ति में उसी प्रकार दुःखी होता है, जैसे मैं अपने उन दो मित्रों की आज्ञा न मानने के कारण दुःखी हो रहा हूँ। | mahabharat अध्याय 10.6: अश्वत्थामाका शिविर-द्वारपर एक अद्भुत पुरुषको देखकर उसपर अस्त्रोंका प्रहार करना और अस्त्रोंके अभावमें चिन्तित हो भगवान् शिवकी शरणमें जाना । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रुवतामप्रियं पथ्यं सुहृदां न शृणोति य:॥ १९॥
स शोचत्यापदं प्राप्य यथाहमतिवर्त्य तौ।
अनुवाद
जो मनुष्य अप्रिय किन्तु हितकर वचन बोलने वाले अपने मित्रों की सलाह नहीं सुनता, वह विपत्ति में उसी प्रकार दुःखी होता है, जैसे मैं अपने उन दो मित्रों की आज्ञा न मानने के कारण दुःखी हो रहा हूँ।
A man who does not listen to the advice of his friends who speak unpleasant but beneficial words, grieves in adversity in the same way as I am suffering because of disobeying the orders of those two friends of mine.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥