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श्लोक 10.6.16-17h  |
तत: स कुपितो द्रौणिरिन्द्रकेतुनिभां गदाम्॥ १६॥
ज्वलन्तीं प्राहिणोत् तस्मै भूतं तामपि चाग्रसत्। |
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| अनुवाद |
| तदनन्तर अश्वत्थामा ने क्रोधित होकर अपनी गदा उस पर चलाई जो इन्द्र के ध्वज के समान चमक रही थी, किन्तु उस भूत ने उसे भी निगल लिया ॥16 1/2॥ |
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| Thereafter Ashvatthama became furious and swung his mace at him which shone like the flag of Indra, but the ghost swallowed that as well. ॥16 1/2॥ |
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