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mahabharat 10.6.16-17h: तदनन्तर अश्वत्थामा ने क्रोधित होकर अपनी गदा उस पर चलाई जो इन्द्र के ध्वज के समान चमक रही थी, किन्तु उस भूत ने उसे भी निगल लिया ॥16 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 10.6: अश्वत्थामाका शिविर-द्वारपर एक अद्भुत पुरुषको देखकर उसपर अस्त्रोंका प्रहार करना और अस्त्रोंके अभावमें चिन्तित हो भगवान् शिवकी शरणमें जाना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 6: अश्वत्थामाका शिविर-द्वारपर एक अद्भुत पुरुषको देखकर उसपर अस्त्रोंका प्रहार करना और अस्त्रोंके अभावमें चिन्तित हो भगवान् शिवकी शरणमें जाना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  10.6.16-17h 
तत: स कुपितो द्रौणिरिन्द्रकेतुनिभां गदाम्॥ १६॥
ज्वलन्तीं प्राहिणोत् तस्मै भूतं तामपि चाग्रसत्।
 
 
अनुवाद
तदनन्तर अश्वत्थामा ने क्रोधित होकर अपनी गदा उस पर चलाई जो इन्द्र के ध्वज के समान चमक रही थी, किन्तु उस भूत ने उसे भी निगल लिया ॥16 1/2॥
 
Thereafter Ashvatthama became furious and swung his mace at him which shone like the flag of Indra, but the ghost swallowed that as well. ॥16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)