Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 10.6.13-14h: उसका अग्र भाग तेज से चमक रहा था। उस महापुरुष से टकराने पर वह रथ उसी प्रकार टुकड़े-टुकड़े हो गया, जैसे प्रलयकाल में आकाश से गिरने वाला विशाल उल्कापिंड सूर्य से टकराकर नष्ट हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 10.6: अश्वत्थामाका शिविर-द्वारपर एक अद्भुत पुरुषको देखकर उसपर अस्त्रोंका प्रहार करना और अस्त्रोंके अभावमें चिन्तित हो भगवान् शिवकी शरणमें जाना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 6: अश्वत्थामाका शिविर-द्वारपर एक अद्भुत पुरुषको देखकर उसपर अस्त्रोंका प्रहार करना और अस्त्रोंके अभावमें चिन्तित हो भगवान् शिवकी शरणमें जाना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  10.6.13-14h 
सा तमाहत्य दीप्ताग्रा रथशक्तिरदीर्यत॥ १३॥
युगान्ते सूर्यमाहत्य महोल्केव दिवश्च्युता।
 
 
अनुवाद
उसका अग्र भाग तेज से चमक रहा था। उस महापुरुष से टकराने पर वह रथ उसी प्रकार टुकड़े-टुकड़े हो गया, जैसे प्रलयकाल में आकाश से गिरने वाला विशाल उल्कापिंड सूर्य से टकराकर नष्ट हो जाता है।
 
Its front portion was shining with brilliance. On colliding with that great man, that chariot was torn to pieces in the same way as a huge meteor falling from the sky during the time of doomsday gets destroyed on colliding with the sun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)