श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 6: अश्वत्थामाका शिविर-द्वारपर एक अद्भुत पुरुषको देखकर उसपर अस्त्रोंका प्रहार करना और अस्त्रोंके अभावमें चिन्तित हो भगवान् शिवकी शरणमें जाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  10.6.1 
धृतराष्ट्र उवाच
द्वारदेशे ततो द्रौणिमवस्थितमवेक्ष्य तौ।
अकुर्वातां भोजकृपौ किं संजय वदस्व मे॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा- संजय! जब कृतवर्मा और कृपाचार्य ने अश्वत्थामा को शिविर के द्वार पर खड़ा देखा तो उन्होंने क्या किया? यह बताओ।
 
Dhritarashtra asked- Sanjay! What did Kritavarma and Kripacharya do when they saw Ashwatthama standing at the entrance of the camp? Tell me this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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