Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.5.7: जिसका भला होता है, उसके हितैषी मित्र उसे पाप करने से रोकते हैं। जो भाग्यवान है, जिसे सुख भोगने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, वह मना करने पर भी उस पापकर्म को करने से रुक जाता है; किन्तु जो अभागा है, वह उस पापकर्म को करने से नहीं रुकता। ॥7॥ | mahabharat अध्याय 10.5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिसका भला होता है, उसके हितैषी मित्र उसे पाप करने से रोकते हैं। जो भाग्यवान है, जिसे सुख भोगने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, वह मना करने पर भी उस पापकर्म को करने से रुक जाता है; किन्तु जो अभागा है, वह उस पापकर्म को करने से नहीं रुकता। ॥7॥
He who is well-cared for, his well-wishing friends stop him from committing sins. He who is fortunate, who is destined to enjoy happiness, stops doing that sinful act when forbidden; but he who is unfortunate, does not stop doing that evil deed. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥