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mahabharat 10.5.40: हे प्रभु! वे तीनों पाण्डवों और पांचालों के शिविर में गए, जहाँ सब लोग सो गए थे। शिविर के द्वार पर पहुँचकर महारथी अश्वत्थामा वहाँ खड़े थे।   |   mahabharat अध्याय 10.5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  10.5.40 
ययुश्च शिबिरं तेषां सम्प्रसुप्तजनं विभो।
द्वारदेशं तु सम्प्राप्य द्रौणिस्तस्थौ महारथ:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! वे तीनों पाण्डवों और पांचालों के शिविर में गए, जहाँ सब लोग सो गए थे। शिविर के द्वार पर पहुँचकर महारथी अश्वत्थामा वहाँ खड़े थे।
 
Lord! The three of them went to the camp of the Pandavas and Panchalas, where everyone had gone to sleep. On reaching the entrance of the camp, the great warrior Ashwatthama stood there. 40.
 
इति श्रीमहाभारते सौप्तिकपर्वणि द्रौणिगमने पञ्चमोऽध्याय:॥ ५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सौप्तिकपर्वमें अश्वत्थामाका प्रयाणविषयक पाँचवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)