Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.5.4: जैसे जीभ दालों का स्वाद जानती है, वैसे ही यदि बुद्धिमान व्यक्ति विवेकशील व्यक्ति की सेवा में दो घड़ी भी बिताता है, तो उसे धर्म का रहस्य शीघ्र ही समझ में आ जाता है ॥4॥ | mahabharat अध्याय 10.5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे जीभ दालों का स्वाद जानती है, वैसे ही यदि बुद्धिमान व्यक्ति विवेकशील व्यक्ति की सेवा में दो घड़ी भी बिताता है, तो उसे धर्म का रहस्य शीघ्र ही समझ में आ जाता है ॥4॥
Just as the tongue knows the taste of pulses, similarly if a wise man spends even two hours in the service of a prudent person, he soon understands the secret of religion. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥