श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  10.5.38 
इत्युक्त्वा रथमास्थाय प्रायादभिमुख: परान्।
तमन्वगात् कृपो राजन् कृतवर्मा च सात्वत:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
राजन! ऐसा कहकर अश्वत्थामा रथ पर सवार होकर शत्रुओं की ओर चल पड़ा। कृपाचार्य और सात्वतवंशी कृतवर्मा भी उसके मार्ग पर चलने लगे॥38॥
 
Rajan! Saying this, Ashwatthama mounted the chariot and proceeded towards the enemies. Kripacharya and Satvatvanshi Kritavarma also started following his path. 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)