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श्लोक  10.5.32 
एकसार्थप्रयातौ स्वस्त्वया सह नरर्षभ।
समदु:खसुखौ चापि नावां शङ्कितुमर्हसि॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम! हम दोनों आपकी सहायता के लिए एकत्रित हुए हैं। आपके सुख-दुःख में हम दोनों बराबर के भागीदार होंगे, आपको हम दोनों पर संदेह नहीं करना चाहिए।
 
‘O best of men! Both of us have come together to help you. We will have an equal share in your joys and sorrows, you should not doubt both of us.’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)