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mahabharat 10.5.29: इस संसार में ऐसा कोई व्यक्ति न तो उत्पन्न हुआ है और न ही उत्पन्न होगा जो उन पांचालों को मारने के मेरे दृढ़ निश्चय को पलट सके।29   |   mahabharat अध्याय 10.5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  10.5.29 
न स जात: पुमाँल्लोके कश्चिन्न स भविष्यति।
यो मे व्यावर्तयेदेतां वधे तेषां कृतां मतिम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में ऐसा कोई व्यक्ति न तो उत्पन्न हुआ है और न ही उत्पन्न होगा जो उन पांचालों को मारने के मेरे दृढ़ निश्चय को पलट सके।29
 
In this world no such person has been born nor will be born who can reverse my firm resolve to kill those Panchalas. 29
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)