Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.5.27: मेरे पिता को सोते समय मारने वाले पांचालों को मारकर यदि मुझे अगले जन्म में कीट-पतंगा भी बनना पड़े तो भी सब स्वीकार है ॥27॥ | mahabharat अध्याय 10.5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पितृहन्तॄनहं हत्वा पञ्चालान् निशि सौप्तिके।
कामं कीट: पतङ्गो वा जन्म प्राप्य भवामि वै॥ २७॥
अनुवाद
मेरे पिता को सोते समय मारने वाले पांचालों को मारकर यदि मुझे अगले जन्म में कीट-पतंगा भी बनना पड़े तो भी सब स्वीकार है ॥27॥
After killing the Panchalas, who had murdered my father while he was asleep, even if I have to become an insect or a moth in my next birth, everything is acceptable. ॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥