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mahabharat 10.5.26: इस प्रकार वे सभी पापी और अधर्मी हैं। पांचालों ने भी धर्म की मर्यादा का उल्लंघन किया है। आप उन पाण्डवों और पांचालों की निंदा क्यों नहीं करते जिन्होंने इस प्रकार मर्यादा का उल्लंघन किया है?॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 10.5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  10.5.26 
एवं चाधार्मिका: पापा: पञ्चाला भिन्नसेतव:।
तानेवं भिन्नमर्यादान् किं भवान् न निगर्हति॥ २६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वे सभी पापी और अधर्मी हैं। पांचालों ने भी धर्म की मर्यादा का उल्लंघन किया है। आप उन पाण्डवों और पांचालों की निंदा क्यों नहीं करते जिन्होंने इस प्रकार मर्यादा का उल्लंघन किया है?॥ 26॥
 
Thus all of them are sinners and irreligious. The Panchalas have also broken the limits of religion. Why do you not condemn the Pandavas and the Panchalas who have broken the limits in this manner?॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)