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mahabharat 10.4.8: जब कृतवर्मा द्वारा सुरक्षित द्रोणपुत्र अश्वत्थामा मुझ कृपाचार्य के विरुद्ध युद्ध के लिए क्रोधपूर्वक प्रवृत्त होगा, तब कौन वीर पुरुष, चाहे वह देवराज इन्द्र ही क्यों न हो, उसका सामना कर सकेगा?॥8॥   |   mahabharat अध्याय 10.4: कृपाचार्यका कल प्रात:काल युद्ध करनेकी सलाह देना और अश्वत्थामाका इसी रात्रिमें सोते हुओंको मारनेका आग्रह प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 4: कृपाचार्यका कल प्रात:काल युद्ध करनेकी सलाह देना और अश्वत्थामाका इसी रात्रिमें सोते हुओंको मारनेका आग्रह प्रकट करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  10.4.8 
कृपेण सहितं यान्तं गुप्तं च कृतवर्मणा।
को द्रौणिं युधि संरब्धं योधयेदपि देवराट्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जब कृतवर्मा द्वारा सुरक्षित द्रोणपुत्र अश्वत्थामा मुझ कृपाचार्य के विरुद्ध युद्ध के लिए क्रोधपूर्वक प्रवृत्त होगा, तब कौन वीर पुरुष, चाहे वह देवराज इन्द्र ही क्यों न हो, उसका सामना कर सकेगा?॥8॥
 
When Drona's son Ashwatthama, protected by Kritavarma, will set out in anger for the war against me, Krupacharya, then which brave man, even if it is Devaraj Indra, can face him? ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)