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mahabharat 10.4.5: हे प्रिय! तुम अपने पराक्रम से शत्रुओं का संहार करने में समर्थ हो, इसलिए आज रात्रि विश्राम करो। तुम बहुत देर से जाग रहे हो, अब आज रात्रि सो जाओ।   |   mahabharat अध्याय 10.4: कृपाचार्यका कल प्रात:काल युद्ध करनेकी सलाह देना और अश्वत्थामाका इसी रात्रिमें सोते हुओंको मारनेका आग्रह प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 4: कृपाचार्यका कल प्रात:काल युद्ध करनेकी सलाह देना और अश्वत्थामाका इसी रात्रिमें सोते हुओंको मारनेका आग्रह प्रकट करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  10.4.5 
शक्तस्त्वमसि विक्रम्य विश्रमस्व निशामिमाम्।
चिरं ते जाग्रतस्तात स्वप तावन्निशामिमाम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे प्रिय! तुम अपने पराक्रम से शत्रुओं का संहार करने में समर्थ हो, इसलिए आज रात्रि विश्राम करो। तुम बहुत देर से जाग रहे हो, अब आज रात्रि सो जाओ।
 
O dear! You are capable of killing your enemies by showing your valour, therefore take rest tonight. You have been awake for a long time, now sleep tonight.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)