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mahabharat 10.4.3: जब तुम शत्रुओं का सामना करने के लिए आगे बढ़ोगे, तब मैं और सात्वतवंशी कृतवर्मा, दोनों कवच धारण करके और रथों पर सवार होकर तुम्हारे साथ चलेंगे॥3॥   |   mahabharat अध्याय 10.4: कृपाचार्यका कल प्रात:काल युद्ध करनेकी सलाह देना और अश्वत्थामाका इसी रात्रिमें सोते हुओंको मारनेका आग्रह प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 4: कृपाचार्यका कल प्रात:काल युद्ध करनेकी सलाह देना और अश्वत्थामाका इसी रात्रिमें सोते हुओंको मारनेका आग्रह प्रकट करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  10.4.3 
अहं त्वामनुयास्यामि कृतवर्मा च सात्वत:।
परानभिमुखं यान्तं रथावास्थाय दंशितौ॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जब तुम शत्रुओं का सामना करने के लिए आगे बढ़ोगे, तब मैं और सात्वतवंशी कृतवर्मा, दोनों कवच धारण करके और रथों पर सवार होकर तुम्हारे साथ चलेंगे॥3॥
 
When you advance to face the enemies, I and Kritavarma from the Satvatas' lineage, both wearing armour and riding on chariots, will accompany you. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)