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mahabharat 10.4.24-25: आपने प्रत्यक्ष देखा है कि इन पापियों ने किस प्रकार मेरे पिता को मारा है। वह घटना मेरे हृदय को बहुत कष्ट पहुँचाती है। ऐसी स्थिति में मुझ जैसा वीर पुरुष इस संसार में दो क्षण भी कैसे जीवित रह सकता है?॥ 24-25॥   |   mahabharat अध्याय 10.4: कृपाचार्यका कल प्रात:काल युद्ध करनेकी सलाह देना और अश्वत्थामाका इसी रात्रिमें सोते हुओंको मारनेका आग्रह प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 4: कृपाचार्यका कल प्रात:काल युद्ध करनेकी सलाह देना और अश्वत्थामाका इसी रात्रिमें सोते हुओंको मारनेका आग्रह प्रकट करना  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  10.4.24-25 
यथा च निहत: पापै: पिता मम विशेषत:॥ २४॥
प्रत्यक्षमपि ते सर्वं तन्मे मर्माणि कृन्तति।
कथं हि मादृशो लोके मुहूर्तमपि जीवति॥ २५॥
 
 
अनुवाद
आपने प्रत्यक्ष देखा है कि इन पापियों ने किस प्रकार मेरे पिता को मारा है। वह घटना मेरे हृदय को बहुत कष्ट पहुँचाती है। ऐसी स्थिति में मुझ जैसा वीर पुरुष इस संसार में दो क्षण भी कैसे जीवित रह सकता है?॥ 24-25॥
 
‘You have seen firsthand how these sinners killed my father in particular. That incident pierces my heart deeply. In such a condition how can a brave man like me survive for even two moments in this world?॥ 24-25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)