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mahabharat 10.4.22: चाचाजी! जो व्यक्ति शोक से व्याकुल, संताप से भरा हुआ, नाना प्रकार की चिन्ता में डूबा हुआ या किसी कामना में मग्न हो, उसे नींद कैसे आ सकती है? देखो, आज मुझ पर ये चारों ही विपत्तियाँ आ पड़ी हैं।   |   mahabharat अध्याय 10.4: कृपाचार्यका कल प्रात:काल युद्ध करनेकी सलाह देना और अश्वत्थामाका इसी रात्रिमें सोते हुओंको मारनेका आग्रह प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 4: कृपाचार्यका कल प्रात:काल युद्ध करनेकी सलाह देना और अश्वत्थामाका इसी रात्रिमें सोते हुओंको मारनेका आग्रह प्रकट करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  10.4.22 
आतुरस्य कुतो निद्रा नरस्यामर्षितस्य च।
अर्थांश्चिन्तयतश्चापि कामयानस्य वा पुन:।
तदिदं समनुप्राप्तं पश्य मेऽद्य चतुष्टयम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
चाचाजी! जो व्यक्ति शोक से व्याकुल, संताप से भरा हुआ, नाना प्रकार की चिन्ता में डूबा हुआ या किसी कामना में मग्न हो, उसे नींद कैसे आ सकती है? देखो, आज मुझ पर ये चारों ही विपत्तियाँ आ पड़ी हैं।
 
Uncle! How can a person who is overwhelmed with grief, filled with resentment, worried about various things or engrossed in some desire, sleep? Look, all these four things have befallen me today.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)