Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 10.4.21: राजन! जब उनके चाचा ने ऐसी हितकारी बातें कहीं, तब द्रोणपुत्र अश्वत्थामा ने क्रोध से आँखें लाल करके उनसे कहा - ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 10.4: कृपाचार्यका कल प्रात:काल युद्ध करनेकी सलाह देना और अश्वत्थामाका इसी रात्रिमें सोते हुओंको मारनेका आग्रह प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 4: कृपाचार्यका कल प्रात:काल युद्ध करनेकी सलाह देना और अश्वत्थामाका इसी रात्रिमें सोते हुओंको मारनेका आग्रह प्रकट करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  10.4.21 
एवमुक्तस्ततो द्रौणिर्मातुलेन हितं वच:।
अब्रवीन्मातुलं राजन् क्रोधसंरक्तलोचन:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
राजन! जब उनके चाचा ने ऐसी हितकारी बातें कहीं, तब द्रोणपुत्र अश्वत्थामा ने क्रोध से आँखें लाल करके उनसे कहा - ॥21॥
 
King! When his uncle said such beneficial words, Drona's son Ashwatthama turned his eyes red with anger and said to him - ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)