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mahabharat 10.4.20: हे निष्पाप महाबाहु योद्धा! कल प्रातःकाल हम सब प्रकार से युद्ध में तुम्हारी सहायता करेंगे। मैं तुमसे यह सत्य कह रहा हूँ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 10.4: कृपाचार्यका कल प्रात:काल युद्ध करनेकी सलाह देना और अश्वत्थामाका इसी रात्रिमें सोते हुओंको मारनेका आग्रह प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 4: कृपाचार्यका कल प्रात:काल युद्ध करनेकी सलाह देना और अश्वत्थामाका इसी रात्रिमें सोते हुओंको मारनेका आग्रह प्रकट करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  10.4.20 
सर्वोपायै: सहायास्ते प्रभाते वयमाहवे।
सत्यमेतन्महाबाहो प्रब्रवीमि तवानघ॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप महाबाहु योद्धा! कल प्रातःकाल हम सब प्रकार से युद्ध में तुम्हारी सहायता करेंगे। मैं तुमसे यह सत्य कह रहा हूँ॥20॥
 
O sinless Mahabahu warrior! Tomorrow morning we will help you in the war by using all means. I am telling you this truth. ॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)