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mahabharat 10.4.11: पिताश्री! हम सब लोग मिलकर युद्धभूमि में आने वाले समस्त शत्रुओं का संहार करके अपार आनन्द का अनुभव करेंगे।॥11॥   |   mahabharat अध्याय 10.4: कृपाचार्यका कल प्रात:काल युद्ध करनेकी सलाह देना और अश्वत्थामाका इसी रात्रिमें सोते हुओंको मारनेका आग्रह प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 4: कृपाचार्यका कल प्रात:काल युद्ध करनेकी सलाह देना और अश्वत्थामाका इसी रात्रिमें सोते हुओंको मारनेका आग्रह प्रकट करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  10.4.11 
ते वयं सहितास्तात सर्वान् शत्रून् समागतान्।
प्रसह्य समरे हत्वा प्रीतिं प्राप्स्याम पुष्कलाम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! हम सब लोग मिलकर युद्धभूमि में आने वाले समस्त शत्रुओं का संहार करके अपार आनन्द का अनुभव करेंगे।॥11॥
 
Father! All of us together will experience immense joy by killing all the enemies that come our way in the battleground. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)