श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 3: अश्वत्थामाका कृपाचार्य और कृतवर्माको उत्तर देते हुए उन्हें अपना क्रूरतापूर्ण निश्चय बताना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  10.3.8 
विचित्रत्वात् तु चित्तानां मनुष्याणां विशेषत:।
चित्तवैक्लव्यमासाद्य सा सा बुद्धि: प्रजायते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘सभी प्राणियों के, विशेषकर मनुष्यों के, मन एक-दूसरे से अद्वितीय एवं भिन्न हैं; अतः नाना प्रकार की घटनाओं के कारण मन में जो व्याकुलता उत्पन्न होती है, उसका आश्रय लेकर नाना प्रकार की बुद्धि उत्पन्न होती है ॥8॥
 
‘The minds of all creatures, especially humans, are unique and different from each other; Therefore, by taking shelter of the distraction that occurs in the mind due to various events, different types of intelligence are born. 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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