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श्लोक 10.3.36  |
अद्य पाञ्चालसेनां तां निहत्य निशि सौप्तिके।
कृतकृत्य: सुखी चैव भविष्यामि महामते॥ ३६॥ |
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| अनुवाद |
| महामते! आज रात को यदि मैं उस पांचाल सेना को सोते हुए मार डालूँ तो मुझे संतोष और प्रसन्नता होगी।' |
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| Mahamate! Tonight I will be satisfied and happy if I kill that Panchala army while they are sleeping.' |
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इति श्रीमहाभारते सौप्तिकपर्वणि द्रौणिमन्त्राणायां तृतीयोऽध्याय:॥ ३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सौप्तिकपर्वमें अश्वत्थामाकी मन्त्रणाविषयक तीसरा अध्याय पूरा हुआ॥ ३॥
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