श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 3: अश्वत्थामाका कृपाचार्य और कृतवर्माको उत्तर देते हुए उन्हें अपना क्रूरतापूर्ण निश्चय बताना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  10.3.35 
अद्य पाञ्चालपाण्डूनां शयितानात्मजान् निशि।
खड्गेन निशितेनाजौ प्रमथिष्यामि गौतम॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
गौतम! आज रात के युद्ध में मैं अपनी तीक्ष्ण तलवार से सोये हुए पांचालों और पाण्डवपुत्रों को टुकड़े-टुकड़े कर डालूँगा।
 
Gautam! In tonight's battle I shall cut into pieces the sleeping Panchalas and the Pandavas' sons with my sharp sword.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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