श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 3: अश्वत्थामाका कृपाचार्य और कृतवर्माको उत्तर देते हुए उन्हें अपना क्रूरतापूर्ण निश्चय बताना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  10.3.34 
अद्य पाञ्चालराजस्य धृष्टद्युम्नस्य वै निशि।
नचिरात् प्रमथिष्यामि पशोरिव शिरो बलात्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
आज रात मैं शीघ्र ही पांचाल नरेश धृष्टद्युम्न का सिर बलपूर्वक पशु के सिर के समान मरोड़ दूँगा।
 
Tonight I will very soon twist the head of the Panchala King Dhrishtadyumna with force, like the head of an animal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)