श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 3: अश्वत्थामाका कृपाचार्य और कृतवर्माको उत्तर देते हुए उन्हें अपना क्रूरतापूर्ण निश्चय बताना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  10.3.33 
दुर्योधनस्य कर्णस्य भीष्मसैन्धवयोरपि।
गमयिष्यामि पञ्चालान् पदवीमद्य दुर्गमाम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
‘आज मैं पांचालों को दुर्योधन, कर्ण, भीष्म और जयद्रथ के कठिन मार्ग पर भेजकर वहीं छोड़ दूँगा।
 
‘Today I will send the Panchalas to the difficult path of Duryodhana, Karna, Bhishma and Jayadratha and leave them there.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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