श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 3: अश्वत्थामाका कृपाचार्य और कृतवर्माको उत्तर देते हुए उन्हें अपना क्रूरतापूर्ण निश्चय बताना  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  10.3.28-29 
अद्य तान् सहितान् सर्वान् धृष्टद्युम्नपुरोगमान्॥ २८॥
सूदयिष्यामि विक्रम्य कक्षं दीप्त इवानल:।
निहत्य चैव पञ्चालान् शान्तिं लब्धास्मि सत्तम॥ २९॥
 
 
अनुवाद
साधुशिरोमणि! जिस प्रकार प्रज्वलित अग्नि सूखे वन या तृण के ढेर को जला देती है, उसी प्रकार आज मैं धृष्टद्युम्न सहित एक साथ सो रहे समस्त पांचालों पर आक्रमण करके उनका वध कर डालूँगा। उनका वध करके ही मुझे शांति मिलेगी।
 
Sadhushiromane! Just as a burning fire burns a dry forest or a pile of straw, similarly today I will attack all the Panchalas sleeping together including Dhrishtadyumna and kill them. I will get peace only after killing them.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd