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mahabharat 10.3.26-27h: रात में मैं उन पांचालों के शिविर में घुसकर, जो शांति से सो रहे होंगे, उन सबको मार डालूँगा। मैं पूरे शिविर को इस तरह तहस-नहस कर दूँगा कि दूसरों के लिए यह मुश्किल हो जाएगा।   |   mahabharat अध्याय 10.3: अश्वत्थामाका कृपाचार्य और कृतवर्माको उत्तर देते हुए उन्हें अपना क्रूरतापूर्ण निश्चय बताना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 3: अश्वत्थामाका कृपाचार्य और कृतवर्माको उत्तर देते हुए उन्हें अपना क्रूरतापूर्ण निश्चय बताना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  10.3.26-27h 
तेषां निशि प्रसुप्तानां सुस्थानां शिबिरे स्वके॥ २६॥
अवस्कन्दं करिष्यामि शिबिरस्याद्य दुष्करम्।
 
 
अनुवाद
रात में मैं उन पांचालों के शिविर में घुसकर, जो शांति से सो रहे होंगे, उन सबको मार डालूँगा। मैं पूरे शिविर को इस तरह तहस-नहस कर दूँगा कि दूसरों के लिए यह मुश्किल हो जाएगा।
 
‘At night, I will enter the camp of those Panchalas who are sleeping peacefully and will kill them all. I will destroy the entire camp in a way that will be difficult for others.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)