श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 3: अश्वत्थामाका कृपाचार्य और कृतवर्माको उत्तर देते हुए उन्हें अपना क्रूरतापूर्ण निश्चय बताना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  10.3.23 
धारयंश्च धनुर्दिव्यं दिव्यान्यस्त्राणि चाहवे।
पितरं निहतं दृष्ट्वा किं नु वक्ष्यामि संसदि॥ २३॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि मेरे पास दिव्य धनुष और दिव्य अस्त्र-शस्त्र हैं, फिर भी यदि मैं युद्ध में अपने पिता को अन्यायपूर्वक मारा हुआ देखूँ और उनकी मृत्यु का बदला न लूँ, तो योद्धाओं की सभा में क्या कहूँगा?
 
Though I possess a divine bow and divine weapons, yet if I see my father killed unjustly in a war and do not avenge his death, what will I say in the assembly of warriors?
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd