Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.3.20: जो ब्राह्मण अपने मन और इन्द्रियों को वश में नहीं रखता, वह अच्छा नहीं माना जाता। जो क्षत्रिय तेजहीन है, वह नीच माना जाता है, जो वैश्य व्यापार में कुशल नहीं है, वह निंदित है और जो शूद्र अन्य वर्णों के विरुद्ध आचरण करता है, वह भी निंदनीय माना जाता है। 20॥ | mahabharat अध्याय 10.3: अश्वत्थामाका कृपाचार्य और कृतवर्माको उत्तर देते हुए उन्हें अपना क्रूरतापूर्ण निश्चय बताना । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो ब्राह्मण अपने मन और इन्द्रियों को वश में नहीं रखता, वह अच्छा नहीं माना जाता। जो क्षत्रिय तेजहीन है, वह नीच माना जाता है, जो वैश्य व्यापार में कुशल नहीं है, वह निंदित है और जो शूद्र अन्य वर्णों के विरुद्ध आचरण करता है, वह भी निंदनीय माना जाता है। 20॥
‘A Brahmin who does not control his mind and senses is not considered good. A Kshatriya without brilliance is considered lowly, a Vaishya who is not skilled in business is condemned and a Shudra who acts contrary to other castes is also considered condemnable. 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥