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mahabharat 10.3.2: उसके हृदय में शोक की अग्नि प्रज्वलित हो उठी। वह उससे जलने लगा और कठोर हृदय होकर उसने कृपाचार्य और कृतवर्मा दोनों से कहा -॥2॥   |   mahabharat अध्याय 10.3: अश्वत्थामाका कृपाचार्य और कृतवर्माको उत्तर देते हुए उन्हें अपना क्रूरतापूर्ण निश्चय बताना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 3: अश्वत्थामाका कृपाचार्य और कृतवर्माको उत्तर देते हुए उन्हें अपना क्रूरतापूर्ण निश्चय बताना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  10.3.2 
दह्यमानस्तु शोकेन प्रदीप्तेनाग्निना यथा।
क्रूरं मनस्तत: कृत्वा तावुभौ प्रत्यभाषत॥ २॥
 
 
अनुवाद
उसके हृदय में शोक की अग्नि प्रज्वलित हो उठी। वह उससे जलने लगा और कठोर हृदय होकर उसने कृपाचार्य और कृतवर्मा दोनों से कहा -॥2॥
 
The fire of grief ignited in his heart. He started burning with it and hardening his heart he said to both Kripacharya and Kritavarma -॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)