श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 3: अश्वत्थामाका कृपाचार्य और कृतवर्माको उत्तर देते हुए उन्हें अपना क्रूरतापूर्ण निश्चय बताना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  10.3.19 
ब्राह्मणे वेदमग्रॺं तु क्षत्रिये तेज उत्तमम्।
दाक्ष्यं वैश्ये च शूद्रे च सर्ववर्णानुकूलताम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
‘वह ब्राह्मण में वेदों का उत्तम ज्ञान, क्षत्रियों में उत्तम तेज, वैश्यों में व्यापार में कुशलता और शूद्रों में समस्त वर्णों के अनुसार आचरण करने की आदत डालता है।॥19॥
 
‘He instills in the Brahmin the best of the Vedas, in the Kshatriyas the best of brilliance, in the Vaishyas skill in business and in the Shudras the habit of behaving in accordance with all the castes.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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