श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 3: अश्वत्थामाका कृपाचार्य और कृतवर्माको उत्तर देते हुए उन्हें अपना क्रूरतापूर्ण निश्चय बताना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  10.3.17 
उपजाता व्यसनजा येयमद्य मतिर्मम।
युवयोस्तां प्रवक्ष्यामि मम शोकविनाशिनीम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
आज मैं तुम दोनों को उस ज्ञान के विषय में बता रहा हूँ जो संकट के कारण मुझमें उत्पन्न हुआ है। वह मेरे शोक का नाश करने वाला है॥17॥
 
‘Today, I am telling you both about the wisdom that has arisen in me due to the crisis. It will destroy my grief.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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