श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 3: अश्वत्थामाका कृपाचार्य और कृतवर्माको उत्तर देते हुए उन्हें अपना क्रूरतापूर्ण निश्चय बताना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  10.3.14 
निश्चित्य तु यथाप्रज्ञं यां मतिं साधु पश्यति।
तया प्रकुरुते भावं सा तस्योद्योगकारिका॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य अपने विवेक के आधार पर निर्णय करके, जिस बुद्धि को वह अच्छा समझता है, उसी के द्वारा अपने कार्य को सिद्ध करने का प्रयत्न करता है। यही बुद्धि उसके प्रयत्न को सफल बनाती है॥14॥
 
‘After reaching a decision based on his discretion, a man tries to accomplish his task by means of the intelligence which he considers good. That intelligence is what makes his endeavour successful.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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