श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 3: अश्वत्थामाका कृपाचार्य और कृतवर्माको उत्तर देते हुए उन्हें अपना क्रूरतापूर्ण निश्चय बताना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  10.3.11 
अन्यया यौवने मर्त्यो बुद्धॺा भवति मोहित:।
मध्येऽन्यया जरायां तु सोऽन्यां रोचयते मतिम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
युवावस्था में मनुष्य एक प्रकार की बुद्धि से मोहित होता है, मध्यावस्था में दूसरी प्रकार की बुद्धि से प्रभावित होता है; किन्तु वृद्धावस्था में उसे दूसरी प्रकार की बुद्धि प्रिय लगने लगती है ॥11॥
 
In youth a man is fascinated by one type of intelligence, in middle age he is influenced by another type of intelligence; but in old age he starts liking a different type of intelligence.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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