श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 3: अश्वत्थामाका कृपाचार्य और कृतवर्माको उत्तर देते हुए उन्हें अपना क्रूरतापूर्ण निश्चय बताना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  10.3.1 
संजय उवाच
कृपस्य वचनं श्रुत्वा धर्मार्थसहितं शुभम्।
अश्वत्थामा महाराज दु:खशोकसमन्वित:॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- महाराज! कृपाचार्य के वचन धर्म और अर्थ से परिपूर्ण तथा मंगलमय थे। उन्हें सुनकर अश्वत्थामा शोक और शोक में डूब गया॥1॥
 
Sanjaya says- Maharaj! Kripacharya's words were full of Dharma and meaning and were auspicious. On hearing them Ashwatthama was drowned in sorrow and grief.॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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