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mahabharat 10.2.8: इन दोनों में ईश्वर अधिक बलवान है। वह स्वयं ही निश्चय करके बिना किसी पुरुषार्थ की अपेक्षा किए हुए अपने कर्म के फल में लग जाता है, किन्तु विद्वान् पुरुष केवल कुशलता का आश्रय लेकर ही पुरुषार्थ में लग जाते हैं ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 10.2: कृपाचार्यका अश्वत्थामाको दैवकी प्रबलता बताते हुए कर्तव्यके विषयमें सत्पुरुषोंसे सलाह लेनेकी प्रेरणा देना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 2: कृपाचार्यका अश्वत्थामाको दैवकी प्रबलता बताते हुए कर्तव्यके विषयमें सत्पुरुषोंसे सलाह लेनेकी प्रेरणा देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  10.2.8 
तयोर्दैवं विनिश्चित्य स्वयं चैव प्रवर्तते।
प्राज्ञा: पुरुषकारेषु वर्तन्ते दाक्ष्यमाश्रिता:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इन दोनों में ईश्वर अधिक बलवान है। वह स्वयं ही निश्चय करके बिना किसी पुरुषार्थ की अपेक्षा किए हुए अपने कर्म के फल में लग जाता है, किन्तु विद्वान् पुरुष केवल कुशलता का आश्रय लेकर ही पुरुषार्थ में लग जाते हैं ॥8॥
 
God is stronger among these two. He himself takes a decision and gets engaged in the fruits of his labor without expecting any effort, however, learned men get engaged in the efforts only by taking the help of skill. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)