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mahabharat 10.2.7: जैसे बादलों ने अच्छी वर्षा की हो और खेत को अच्छी तरह जोता हो, तो उसमें बोया गया बीज अधिक लाभदायक हो सकता है। उसी प्रकार मनुष्य की समस्त उपलब्धियाँ भाग्य और पुरुषार्थ के सहयोग पर निर्भर हैं। ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 10.2: कृपाचार्यका अश्वत्थामाको दैवकी प्रबलता बताते हुए कर्तव्यके विषयमें सत्पुरुषोंसे सलाह लेनेकी प्रेरणा देना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 2: कृपाचार्यका अश्वत्थामाको दैवकी प्रबलता बताते हुए कर्तव्यके विषयमें सत्पुरुषोंसे सलाह लेनेकी प्रेरणा देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  10.2.7 
सुवृष्टे च यथा देवे सम्यक् क्षेत्रे च कर्षिते।
बीजं महागुणं भूयात् तथा सिद्धिर्हि मानुषी॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जैसे बादलों ने अच्छी वर्षा की हो और खेत को अच्छी तरह जोता हो, तो उसमें बोया गया बीज अधिक लाभदायक हो सकता है। उसी प्रकार मनुष्य की समस्त उपलब्धियाँ भाग्य और पुरुषार्थ के सहयोग पर निर्भर हैं। ॥7॥
 
Just as when the clouds have rained well and the field has been ploughed well, then the seed sown in it can be more profitable. Similarly, all the achievements of humans are dependent on the cooperation of destiny and effort. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)