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mahabharat 10.2.5: बादल पर्वत पर बरसकर कौन-सा फल देता है? यदि वह जोते हुए खेत पर बरसता है, तो कौन-सा फल नहीं दे सकता? ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 10.2: कृपाचार्यका अश्वत्थामाको दैवकी प्रबलता बताते हुए कर्तव्यके विषयमें सत्पुरुषोंसे सलाह लेनेकी प्रेरणा देना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 2: कृपाचार्यका अश्वत्थामाको दैवकी प्रबलता बताते हुए कर्तव्यके विषयमें सत्पुरुषोंसे सलाह लेनेकी प्रेरणा देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  10.2.5 
पर्जन्य: पर्वते वर्षन् किन्नु साधयते फलम्।
कृष्टे क्षेत्रे तथा वर्षन् किन्न साधयते फलम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
बादल पर्वत पर बरसकर कौन-सा फल देता है? यदि वह जोते हुए खेत पर बरसता है, तो कौन-सा फल नहीं दे सकता? ॥5॥
 
What fruit does a cloud achieve by raining on a mountain? If it rains on a ploughed field, what fruit cannot it produce? ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)