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mahabharat 10.2.4: समस्त शुभ-अशुभ कर्म उन्हीं से जुड़े हुए हैं। उन्हीं के माध्यम से कर्म और निवृत्ति से संबंधित क्रियाएँ होती हुई देखी जाती हैं॥4॥   |   mahabharat अध्याय 10.2: कृपाचार्यका अश्वत्थामाको दैवकी प्रबलता बताते हुए कर्तव्यके विषयमें सत्पुरुषोंसे सलाह लेनेकी प्रेरणा देना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 2: कृपाचार्यका अश्वत्थामाको दैवकी प्रबलता बताते हुए कर्तव्यके विषयमें सत्पुरुषोंसे सलाह लेनेकी प्रेरणा देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  10.2.4 
ताभ्यामुभाभ्यां सर्वार्था निबद्धा अधमोत्तमा:।
प्रवृत्ताश्चैव दृश्यन्ते निवृत्ताश्चैव सर्वश:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
समस्त शुभ-अशुभ कर्म उन्हीं से जुड़े हुए हैं। उन्हीं के माध्यम से कर्म और निवृत्ति से संबंधित क्रियाएँ होती हुई देखी जाती हैं॥4॥
 
All the good and bad activities are linked to them. It is through them that activities related to action and retirement are seen to be taking place.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)