श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 2: कृपाचार्यका अश्वत्थामाको दैवकी प्रबलता बताते हुए कर्तव्यके विषयमें सत्पुरुषोंसे सलाह लेनेकी प्रेरणा देना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  10.2.22-23h 
उत्थायोत्थाय हि सदा प्रष्टव्या वृद्धसम्मता:॥ २२॥
ते स्म योगे परं मूलं तन्मूला सिद्धिरुच्यते।
 
 
अनुवाद
प्रतिदिन प्रातः उठकर अपने से बड़ों से अपने लिए क्या अच्छा है, यह पूछना चाहिए, क्योंकि जो नहीं चाहिए, उसकी प्राप्ति का मुख्य कारण वे ही होते हैं। उनके द्वारा सुझाया गया उपाय ही सफलता का मूल कारण कहलाता है ॥22 1/2॥
 
Every morning one should get up and ask the elders about what is good for oneself because they are the main reason for achieving what one does not want. The solution suggested by them is called the root cause of success. ॥22 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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