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mahabharat 10.2.16: यदि कोई कुशल पुरुष किसी कार्य को आरम्भ करता है, परन्तु उससे कोई फल प्राप्त नहीं करता, तो उसके लिए उसे दोष नहीं दिया जा सकता, अन्यथा वह अवश्य ही अपने अभीष्ट लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 10.2: कृपाचार्यका अश्वत्थामाको दैवकी प्रबलता बताते हुए कर्तव्यके विषयमें सत्पुरुषोंसे सलाह लेनेकी प्रेरणा देना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 2: कृपाचार्यका अश्वत्थामाको दैवकी प्रबलता बताते हुए कर्तव्यके विषयमें सत्पुरुषोंसे सलाह लेनेकी प्रेरणा देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  10.2.16 
यदि दक्ष: समारम्भात् कर्मणो नाश्नुते फलम्।
नास्य वाच्यं भवेत् किंचिल्लब्धव्यं वाधिगच्छति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई कुशल पुरुष किसी कार्य को आरम्भ करता है, परन्तु उससे कोई फल प्राप्त नहीं करता, तो उसके लिए उसे दोष नहीं दिया जा सकता, अन्यथा वह अवश्य ही अपने अभीष्ट लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है ॥16॥
 
If a skilled man starts a task but does not get any result from it, he cannot be blamed for it, or he certainly achieves his desired goal. ॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)