श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 2: कृपाचार्यका अश्वत्थामाको दैवकी प्रबलता बताते हुए कर्तव्यके विषयमें सत्पुरुषोंसे सलाह लेनेकी प्रेरणा देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  10.2.14 
चेष्टामकु‍‍र्वल्‍ँलभते यदि किंचिद् यदृच्छया।
यो वा न लभते कृत्वा दुर्दर्शौ तावुभावपि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई बिना प्रयत्न किए ही भगवान् की इच्छा से कुछ प्राप्त कर लेता है, अथवा यदि कोई प्रयत्न करने पर भी कुछ प्राप्त नहीं करता, तो इन दो प्रकार के लोगों का मिलना बहुत कठिन है ॥14॥
 
If someone obtains something by the will of God without making any effort, or if someone does not obtain anything even after making efforts, it is very difficult to find these two kinds of people. ॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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