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mahabharat 10.2.11: इस संसार में चतुर मनुष्यों द्वारा किए गए उत्तम प्रयास भी, यदि वे भगवान की सहायता से वंचित हों, तो निष्फल प्रतीत होते हैं ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 10.2: कृपाचार्यका अश्वत्थामाको दैवकी प्रबलता बताते हुए कर्तव्यके विषयमें सत्पुरुषोंसे सलाह लेनेकी प्रेरणा देना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 2: कृपाचार्यका अश्वत्थामाको दैवकी प्रबलता बताते हुए कर्तव्यके विषयमें सत्पुरुषोंसे सलाह लेनेकी प्रेरणा देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  10.2.11 
उत्थानं च मनुष्याणां दक्षाणां दैववर्जितम्।
अफलं दृश्यते लोके सम्यगप्युपपादितम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में चतुर मनुष्यों द्वारा किए गए उत्तम प्रयास भी, यदि वे भगवान की सहायता से वंचित हों, तो निष्फल प्रतीत होते हैं ॥11॥
 
Even the best efforts made by clever people seem to be fruitless in this world if they are deprived of the help of God. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)