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श्लोक 10.2.1  |
कृप उवाच
श्रुतं ते वचनं सर्वं यद् यदुक्तं त्वया विभो।
ममापि तु वच: किंचिच्छृणुष्वाद्य महाभुज॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| तब कृपाचार्य बोले- हे महाबाहो! मैंने आपकी सारी बातें सुन लीं। अब मेरी भी बात सुनिए।॥1॥ |
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| Then Krupacharya said- O powerful Mahabaho! I have heard everything you have said. Now listen to me too.॥ 1॥ |
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