vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 10: सौप्तिक पर्व
»
अध्याय 18: महादेवजीके कोपसे देवता, यज्ञ और जगत्की दुरवस्था तथा उनके प्रसादसे सबका स्वस्थ होना
»
श्लोक 9
श्लोक
10.18.9
तमात्तकार्मुकं दृष्ट्वा ब्रह्मचारिणमव्ययम्।
विव्यथे पृथिवी देवी पर्वताश्च चकम्पिरे॥ ९॥
अनुवाद
ब्रह्मचारी और अविनाशी रुद्र को अपने हाथों में धनुष धारण करते देख देवी पृथ्वी को बहुत दुःख हुआ और पर्वत भी कांपने लगे।
Seeing the celibate and indestructible Rudra holding the bow in his hands, Goddess Earth felt very sad and even the mountains began to tremble.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×