श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 18: महादेवजीके कोपसे देवता, यज्ञ और जगत‍्की दुरवस्था तथा उनके प्रसादसे सबका स्वस्थ होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  10.18.9 
तमात्तकार्मुकं दृष्ट्वा ब्रह्मचारिणमव्ययम्।
विव्यथे पृथिवी देवी पर्वताश्च चकम्पिरे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मचारी और अविनाशी रुद्र को अपने हाथों में धनुष धारण करते देख देवी पृथ्वी को बहुत दुःख हुआ और पर्वत भी कांपने लगे।
 
Seeing the celibate and indestructible Rudra holding the bow in his hands, Goddess Earth felt very sad and even the mountains began to tremble.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)