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श्लोक  10.18.8 
तत: क्रुद्धो महादेवस्तदुपादाय कार्मुकम्।
आजगामाथ तत्रैव यत्र देवा: समीजिरे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् क्रोधित महादेवजी धनुष लेकर उसी स्थान पर आये, जहाँ देवता यज्ञ कर रहे थे।
 
Thereafter an enraged Mahadevji took the bow and came to the same place where the gods were performing yajna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)