श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 18: महादेवजीके कोपसे देवता, यज्ञ और जगत‍्की दुरवस्था तथा उनके प्रसादसे सबका स्वस्थ होना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  10.18.6 
लोकयज्ञैर्नृयज्ञैश्च कपर्दी विदधे धनु:।
धनु: सृष्टमभूत् तस्य पञ्चकिष्कुप्रमाणत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
सिर पर जटाएँ धारण करने वाले भगवान शिव ने लोक और मानव यज्ञ से एक धनुष बनाया था। उनका धनुष पाँच फुट लम्बा था॥6॥
 
Lord Shiva, who has matted locks on his head, created a bow from public and human sacrifices. His bow was made five feet long.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)