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श्री महाभारत
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पर्व 10: सौप्तिक पर्व
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अध्याय 18: महादेवजीके कोपसे देवता, यज्ञ और जगत्की दुरवस्था तथा उनके प्रसादसे सबका स्वस्थ होना
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श्लोक 5
श्लोक
10.18.5
लोकयज्ञ: क्रियायज्ञो गृहयज्ञ: सनातन:।
पञ्चभूतनृयज्ञश्च जज्ञे सर्वमिदं जगत्॥ ५॥
अनुवाद
लोकयज्ञ, क्रियायज्ञ, सनातन गृहयज्ञ, पंचभूतयज्ञ और मन्युयज्ञ- ये पाँच प्रकार के यज्ञ हैं। इन्हीं से यह सम्पूर्ण जगत् उत्पन्न होता है। 5॥
Lokayagya, Kriyayagya, Sanatana Grihayagya, Panchbhutayagya and Manyuyagya – these are the five types of yagya. From these comes this entire world. 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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